कविता :: कोंस्टेंटीन पी. कवाफ़ी अनुवाद और प्रस्तुति : अंचित बर्बरों का इंतज़ार  यहाँ बैठक में इस तरह जमा होकर हम लोग क्या कर रहे हैं? आज बर्बर आने वाले हैं. आज संसद में कुछ हो क्यों नहीं रहा? आज…

Continue Reading

कविताएँ :: आदित्य प्रकाश वर्मा  चाँद पर कविता कवि ने लिखी चाँद पर कितनी कविताएं, जब भी कवि और चाँद नजर मिलाते थे, पर अब, कविताएं नहीं है, उनकी नजर मिलती है, पर कविताएं नहीं हैं. चाँद ने भी, बादलों…

Continue Reading

कविताएँ :: योगेश ध्यानी जगह १. उस विशाल कमरे में कितनी कम जगह है जहाँ रहता है कुछ गुलदानों संग एक व्यक्ति सम्पूर्ण विलासिता के साथ. कितनी ज्यादा जगह है रेल के उस तृतीय श्रेणी कोच में जहां ठूँसे हुए…

Continue Reading

कविताएँ :: रूपेश चौरसिया १. प्रिय, मैं तुमसे तब बात करना चाहूंगा जब धरती स्थिर हो जाएगी, रात गहरी नींद में सोई रहेगी, हवाएँ खामोश रहेंगी, चाँद हमारी पहरेदारी करेगा कि कोई आवाज हमसे न टकरा जाए. २. पते पर…

Continue Reading

फ़रोग फ़रुखज़ाद की कविताएँ :: अंग्रेजी से अनुवाद : श्री विलास सिंह “… इन कविताओं का अनुवाद मैंने मूल परशियन के अंग्रेज़ी अनुवाद से किया है। फ़रोग फ़रुखज़ाद (1934-1967) ने केवल बत्तीस वर्ष की अल्प आयु पाई किंतु इसी अवधि…

Continue Reading