कविताएँ :: दीपांकर दीप मुट्ठी भर गाँव आज फुरसत में था तो यूँ ही खोलकर बैठ गया पापा की पुरानी अटैची। पड़ी थी उसमें कितनी ही ब्लैक एंड व्हाइट पुरानी तस्वीरें जिनके बैकग्राउंड में थी कहीं दादी माँ की एक…
POEMS :: PRIYA PRIYADARSHNI Poetry My words, My poems, What do they mean to you? They exist for me. Those unfinished lines I write, The pain I feel, The wounds which might never heal! In every love song There is…
सेनेका के कुछ उद्धरण :: चयन और प्रस्तुति : अंचित सेनेका रोमन दार्शनिक था. वह नीरो का शिक्षक और सलाहकार भी रहा. हम सेनेका को उसके उदासीनता के दर्शन की वजह से जानते हैं. जब आप विरह में होते हैं…
कविता :: येहुदा आमिखाई अनुवाद एवं प्रस्तुति : अंचित येहुदा आमिखाई (3 मई 1924 – 22 सितम्बर 2000) ईसरायली कवि हैं. उन्होंने हिब्रू में कविताएँ लिखी हैं और सभी बड़ी विश्व भाषाओं में अनूदित हैं. वे मानते रहे कि तमाम…
कविता :: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ स्वर : उपांशु राजे ने अपनी रखवाली की; किला बनाकर रहा; बड़ी-बड़ी फ़ौजें रखीं। चापलूस कितने सामन्त आए। मतलब की लकड़ी पकड़े हुए। कितने ब्राह्मण आए पोथियों में जनता को बाँधे हुए। कवियों ने उसकी…
