नए रास्ते :: साहित्य और कोरोनाकाल : अंचित कोरोना और साहित्य के सम्बन्ध में कुछ सीधा कहने और बोलने से बचता रहा था अभी तक. इधर सत्यम ने अपने चैनल के लिए कुछ बोलने की बात की तो मुझको लगा…

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कविता :: बहुत शर्म आती है : मुक्तिबोध स्वर : आसिया नक़वी बहुत शर्म आती है मैंने खून बहाया नहीं तुम्हारे साथ बहुत तड़पकर उठे वज्र से गलियों के जब खेत खलिहानों के हाथ बहुत खून था छोटी छोटी पंखुरियों…

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कविताएँ : निज़ार क़ब्बानी अनुवाद और प्रस्तुति : विष्णु पाठक निज़ार क़ब्बानी का जन्म सीरिया की राजधानी डमस्कस में मिश्रित तुर्की और अरब मूल के एक मध्यम वर्ग के व्यापारी परिवार में हुआ था। जब क़ब्बानी 15 वर्ष के थे,…

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मार्केज के कुछ उद्धरण :: अनुवाद और प्रस्तुति : अंचित लव इन द टाइम्ज़ ऑफ़ कॉलरा, मार्केज की अमर कृति है और एक वैश्विक महामारी के समय में एक आधी शताब्दी से इंतज़ार करते आदमी को उसका प्रेम वापस मिल…

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संजय कुंदन की कविता : जा रहे हम प्रस्तुति : अंचित ●●● संजय कुंदन चर्चित कवि-कथाकार हैं। उनसे sanjaykundan2@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।  

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